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डार्ट्स

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डार्ट्स की उत्पत्ति 14वीं सदी के इंग्लैंड में हुई, सौ साल के युद्ध (1337-1453) के दौरान। अंग्रेज़ तीरंदाज़ लड़ाइयों के बीच पेड़ों के तनों के कटे हुए टुकड़ों पर छोटे तीर फेंकते थे। लकड़ी के प्राकृतिक वृद्धि-वलय संकेंद्रित वृत्त बनाते थे जो प्रारंभिक स्कोरिंग ज़ोन का काम करते थे। अंग्रेज़ी शब्द "dart" पुराने फ्रेंच शब्द "dard" (भाला) से आया है, जो 13वीं सदी से प्रमाणित है। कहा जाता है कि ऐन बोलिन ने 1530 में हेनरी अष्टम को सजावटी डार्ट्स का एक सेट उपहार में दिया था, और मेफ्लावर के तीर्थयात्रियों ने 1620 में अपनी अटलांटिक यात्रा के दौरान डार्ट्स खेला था, विलियम ब्रैडफोर्ड की डायरी के अनुसार।

17वीं सदी तक यह खेल सैन्य शिविरों से निकलकर अंग्रेज़ी सरायों और शराबखानों में पहुँच गया। शुरुआती लक्ष्य-पट्ट एल्म (Ulmus) की लकड़ी से बनाए जाते थे, जिसके रेशे डार्ट की नोक को पट्ट को फाड़े बिना टिकने देते थे। लकड़ी को हर रात पानी में भिगोना पड़ता था ताकि वह सूखकर न फटे। 1930 के दशक में, निर्माता नोडोर (Nodor — "no odour" यानी "बिना गंध" का संक्षेप) ने सिसल (एगेव फाइबर) से बने बोर्ड पेश करके खेल में क्रांति ला दी — ये कहीं अधिक टिकाऊ थे और रोज़ाना भिगोने की ज़रूरत नहीं थी। यह सामग्री आज भी सभी प्रतियोगिता-स्तर के बोर्ड में इस्तेमाल होती है।

1896 में, लंकाशायर के बढ़ई ब्रायन गैमलिन ने 20 क्रमांकित खंडों की आधुनिक व्यवस्था तैयार की। उनकी प्रणाली डिज़ाइन की उत्कृष्ट कृति है: सबसे ज़्यादा वांछित ज़ोन 20 के दोनों ओर 1 और 5 हैं, जिससे थोड़ा भटका हुआ थ्रो बहुत कम अंक देता है। गणितज्ञों ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता की पुष्टि की है: साल्फ़र्ड विश्वविद्यालय के डेविड पर्सी ने 2002 में दिखाया कि 20 संख्याओं के 121 अरब से ज़्यादा संभावित क्रम हैं, और गैमलिन का लेआउट अशुद्धता को दंडित करने में शीर्ष 3% में आता है। 1924 में लंदन में नेशनल डार्ट्स एसोसिएशन की स्थापना हुई, जिसने मानक तय किए: 451 मिमी व्यास, केंद्र (बुल) ज़मीन से 1.73 मीटर ऊपर, और फेंकने की दूरी 2.37 मीटर (जिसे "ओशे" कहते हैं, संभवतः पुराने फ्रेंच "ocher" यानी खाँचा बनाना से लिया गया)।

1908 में लीड्स के कोर्ट में एक निर्णायक क्षण आया। पब मालिक जिम गार्साइड पर अवैध जुआ आयोजित करने का मुक़दमा चला, तो उन्होंने स्थानीय चैंपियन विलियम "बिगफ़ुट" ऐनाकिन को जज के सामने तीन डार्ट फेंकने का न्योता दिया। ऐनाकिन ने तीनों 20 में लगाए, फिर जज ने कोशिश की और असफल रहे। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि डार्ट्स कौशल का खेल है, किस्मत का नहीं — इससे पब में इसके क़ानूनी खेल का रास्ता खुल गया। यह ऐतिहासिक प्रसंग आज भी ब्रिटिश डार्ट्स ऑर्गनाइज़ेशन (BDO) के आधिकारिक इतिहास में उद्धृत किया जाता है, जिसकी स्थापना 1973 में ओली क्रॉफ्ट ने की थी।

खेल का पेशेवरीकरण 1970-1980 के दशकों में तेज़ हुआ। 1978 में, BDO विश्व चैंपियनशिप का पहला फ़ाइनल BBC पर प्रसारित हुआ, जिसने ब्रिटेन में 80 लाख दर्शकों को आकर्षित किया। पोंटिप्रिड के वेल्श खिलाड़ी लेटन रीस ने यह पहला विश्व ख़िताब जीता। 1994 में, फ़िल टेलर के नेतृत्व में 16 खिलाड़ियों ने BDO छोड़कर प्रोफ़ेशनल डार्ट्स कॉर्पोरेशन (PDC) की स्थापना की, जिससे एक विभाजन हुआ जो 2020 में दोनों सर्किट के विलय तक चला। PDC ने डार्ट्स को एक तमाशे में बदल दिया: लंदन के एलेक्ज़ेंड्रा पैलेस ("एली पैली") में विश्व चैंपियनशिप अब दो हफ़्तों में 90,000 से ज़्यादा दर्शक खींचती है और Sky Sports पर फ़ाइनल के 35 लाख टीवी दर्शक होते हैं।

फ़िल "द पावर" टेलर ने 16 PDC विश्व ख़िताबों (1995-2013) और 214 प्रमुख टूर्नामेंट जीत के साथ इस खेल पर अभूतपूर्व प्रभुत्व जमाया। 2010 में एक ही टेलीविज़्ड फ़ाइनल में दो 9-डार्टर (केवल 9 डार्ट्स में 501 से शून्य — परफ़ेक्ट लेग) का उनका रिकॉर्ड आज भी अटूट है। डच खिलाड़ी माइकल वैन गेरवेन ("माइटी माइक"), तीन बार के विश्व चैंपियन (2014, 2017, 2019), ट्रिपल-20 प्रतिशत नियमित रूप से 50% से ऊपर रखते हैं। आज, इलेक्ट्रॉनिक डार्टबोर्ड और मोबाइल ऐप इस खेल को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं: वर्ल्ड डार्ट्स फ़ेडरेशन के अनुसार यूरोप में 1.7 करोड़ से ज़्यादा लोग नियमित रूप से डार्ट्स खेलते हैं, और यह खेल 2000 के दशक की शुरुआत से ओलंपिक खेलों का उम्मीदवार है।